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हरि मुख अनल

पद · लगभग २ मिनट
हरि मुख अनल, सकल सुर मुनि मुख,तिन तन धरम धारि धुर लीनी।थिर राख्यौ मख भाग लोक सुर,निज मरजाद भक्ति भली कीनी॥तबहीं तैं सगुन उपासन सेवा,भई पत विमल लोक सुर हीनी॥छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल,सब सुखनिधि अपने कौ दीनी॥

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