आए प्रचंड रिपु, शब्द सुन उन्हीं का,भेजी सभी जगह एक झुकी कमानज्यों युद्ध चिह्न समझे सब लोग धाए,त्यों साथ थी कह रही यह व्योम वाणी -‘सुना नहीं क्या रणशंखनाद ?चलो पके खेत किसान छोड़ोपक्षी इन्हें खाएँ, तुम्हें पड़ा क्या?भाले भिदाओ, अब खड्ग खोलोहवा इन्हें साफ किया करेगी -लो शस्त्र, हो लालन देश छातीस्वाधीन का सुत किसान सशस्त्र दौड़ाआगे गई धनुष के संग व्योमवाणी(ii)उठा पुरानी तलवार लीजैस्वतंत्र छूटें अब बाघ भालू,पराक्रमी और शिकार कीजैबिना सताए मृग चौकड़ी लेंलो शस्त्र, हैं शत्रु समीप आएआया सशस्त्र, तज के मृगया अधूरी,आगे गई धनुष के संग व्योमवाणी(iii)ज्योंनार छोड़ो सुख की रई सीगीतांत की बात न वीर जोहोचाहे घना झाग सूरा दिखावैप्रकाश में सुंदरि नाचती होंप्रासाद छोड़, सब छोड़ दौड़ो,स्वदेश के शत्रु अवश्य मारो,सरदार के शत्रु अवश्य मारो,सरदार ने धनुष ले, तुरही बजाईआगे गई धनुष के संग व्योमवाणी(iv)राजन! पिता की वीरता को,कुंजों, किलों में सब गा रहे हैंगोपाल बैठे जहाँ गीत गावैं,या भाट वीणा झनका रहे हैंअफीम छोड़ो कुल शत्रु आएनया तुम्हारा यश भार पावैंबंदूक ले नृपकुमार बना सुनेता,आगे गई धनुष के संग व्योमवाणी(v)छोड़ो अधूरा अब यज्ञ ब्रह्मणवेदांत-पारायण को बिसारोविदेश ही का बलिवैश्वदेव,औ तर्पनों में रिपु-रक्त दारोशस्त्रार्थ शास्त्रार्थ गिनो अभी से -चलो दिखाओ, हम अग्रजन्मा,धोती सम्हाल, कुश छोड़, सबाण दौड़ेआगे गई धनुष के संग व्योमवाणी(vi)माता न रोको निज पुत्र आज,संग्राम का मोद उसे चखाओतलवार भाले निज को दिखाओतू सुंदरी ले प्रिय से विदाईस्वदेश माँगे उनकी सहाईआगे गई धनुष के संग व्योमवाणीहै सत्य की विजय, निश्चय बात जानी,है जन्मभूमि जिनको जननी समान,स्वातंत्र्य है प्रिय जिन्हें शुभ स्वर्ग से भीअन्याय की जकड़ती कटु बेड़ियों कोविद्वान वे कब समीप निवास देंगे?

