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जागि रे जीव जागि रे

पद · लगभग २ मिनट
जागि रे जीव जागि रे।चोरन को डर बात कहत हैं, उठि उठि पहरै लागि रे॥ टेक॥ररा करि टोप समां करि बखतर, ग्यान रतन करि ताग रे।ऐसै जौ अजराइल मारै, मस्तकि आवै भाग रे॥ऐसी जागणी जे को जागै, तौ हरि देइ सुहाग रे।कहै कबीर जग्या ही चाहिए, क्या गृह क्या बैराग रे॥350॥

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