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घर ही के बाढ़े रावरे

पद · लगभग २ मिनट
घर ही के बाढ़े रावरे।नाहिंन मीत बियोगबस परे अनवउगे अलि बावरे!भुखमरि जाय चरै नहिं तिनुका सिंह को यहै स्वभाव रे।स्रवन सुधा-मुरली के पोषे जोग-जहर न खवाव, रे!ऊधो हमहि सीख का दैहो? हरि बिनु अनत न ठाँव रे!सूरदास कहा लै कीजै थाही नदिया नाव, रे!॥३२॥

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