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ए अलि! कहा जोग में नीको?

पद · लगभग २ मिनट

राग बिलावल

ए अलि! कहा जोग में नीको?तजि रसरीति नंदनंदन की सिखवत निर्गुन फीको॥देखत सुनत नाहिं कछु स्रवननि, ज्योति ज्योति करि ध्यावत।सुंदरस्याम दयालु कृपानिधि कैसे हौ बिसरावत?सुनि रसाल मुरली-सुर की धुनि सोई कौतुक-रस भूलैं।अपनी भुजा ग्रीव पर मेलैं गोपिन के सुख फूलैं॥लोककानि कुल को भ्रम प्रभु मिलि मिलि कै घर बन खेली।अब तुम सूर खवावन आए जोग जहर की बेली॥२६॥

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