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रैदास इक ही बूंद सो, सब ही भयो वित्थार

दोहा · लगभग २ मिनट
रैदास इक ही बूंद सो, सब ही भयो वित्थार।मुरखि हैं तो करत हैं, बरन अवरन विचार॥

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