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हाशिया
कविता
रहिमन सूधी चाल सों, प्यादा होत वजीर
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन सूधी चाल सों, प्यादा होत वजीर।
फरजी मीर न होइ सकै, टेढ़े की तासीर॥१६२॥
॥
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रहिमन सुधि सबते भली, लगै जो बारम्बार
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रहिमन सो न कछू गनै, जासों लागैं नैन
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रहिमन कीन्ही प्रीत, साहब को भावै नहीं
रहीम
कविता
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रहीम
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हरुए गवन नबेलिआ, डीठि बचाइ
रहीम
कविता
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रहीम
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रहीम
कविता
सुन्दर चतुर धनिकवा, कुल को ऊँच
रहीम
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