परम बियोगिनि गोबिंद बिनु कैसे बितवैं दिन सावन के?हरित भूमि, भरे सलिल सरोवर, मिटे मग मोहन आवन के॥पहिरे सुहाए सुबास सुहागिनि झुंडन झूलन गावन के।गरजत घुमरि घमंड दामिनी मदन धनुष धरि धावन के॥दादुर मोर सोर सारँग पिक सोहैं निसा सूरमा वन के।सूरदास निसि कैसे निघटत त्रिगुन किए सिर रावन के॥२८३॥

