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हाशिया
कविता
मो मन मानिक लै गयो, चितै चोर नँदनंद
रसखान
दोहा · लगभग २ मिनट
मो मन मानिक लै गयो, चितै चोर नँदनंद।
अब बेमन मैं का करूँ, परी फेर के फंद॥
॥
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