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रहिमन कठिन चितान ते, चिन्ता को चित चेत

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन कठिन चितान ते, चिन्ता को चित चेत।चिता दहति निर्जीव को, चिन्ता जीव समेत॥१५६॥

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