मुख्य पाठ पर जाएँ
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
मेरी सूची
पढ़ना शुरू करें
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
खोजें और पढ़ें
कहानियाँ
कविताएँ
उपन्यास
निबंध
रस से पढ़ें
लेखक
संग्रह
हाशिया
कविता
भले बुरे जहँ एक से तहाँ न बसिए जाय
वृंद
दोहा · लगभग २ मिनट
भले बुरे जहँ एक से तहाँ न बसिए जाय।
ज्यौं अन्यायीपुर बिकै खर गुर एकै भाय॥
॥
साझा करें
सहेजें
अ−
अ+
पिछला
बिन स्वारथ कैसैं सहै कोऊ करुए बैन
अगला
नीकी पै फीकी लगै बिनु अवसर की बात
अब कुछ और पढ़ें
खल बंचत नर सुजन कौं नहि न बिसास करेइ
वृंद
कविता
खल बंचत नर सुजन कौं नहि न बिसास करेइ
वृंद
२ मिनट का पाठ
जो जाकौ गुन जानही सो तिहिँ आदर देत
वृंद
कविता
जो जाकौ गुन जानही सो तिहिँ आदर देत
वृंद
२ मिनट का पाठ
नीकी पै फीकी लगै बिनु अवसर की बात
वृंद
कविता
नीकी पै फीकी लगै बिनु अवसर की बात
वृंद
२ मिनट का पाठ