भली भई जु मैं पड्या, गई दशा सय भूलि ।पाला गलि पांणी भया, दुलि मिलिया उस कृति॥१८॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीरकवितासुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीर२ मिनट का पाठ