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का नाँगे का बाँधे चाम, जौ नहीं चीन्हसि आतम राम

पद · लगभग २ मिनट
का नाँगे का बाँधे चाम, जौ नहीं चीन्हसि आतम राम॥ टेक॥नागे फिरें जोग जे होई, बन का मृग मुकुति गया कोई॥मूँड़ मूड़ायै जौ सिधि होई, स्वर्ग ही भेड़ न पहुँची कोई॥ब्यंद राखि जे खेलै है भाई, तौ षुसरै कौंण परँम गति पाई॥पढ़ें गुनें उपजै अहंकारा, अधधर डूबे वार न पारा॥कहै कबीर सुनहु रे भाई, राम नाम किन सिधि पाई॥132॥

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