मेरे जैसे बनिज सौ कवन काज,मूल घटै सिरि बधै ब्याज॥ टेक॥नाइक एक बनिजारे पाँच, बैल पचीस कौ संग साथ।नव बहियां दस गौनि आहि, कसनि बहत्तरि लागै ताहि॥सात सूत मिलि बनिज कीन्ह, कर्म पयादौ संग लीन्ह॥तीन जगति करत रारि, चल्यो है बनिज वा बनज झारि॥बनिज खुटानीं पूँजी टूटि, षाडू दह दिसि गयौ फूटि॥कहै कबीर यहु जन्म बाद, सहजि समांनूं रही लादि॥383॥

मेरे जैसे बनिज सौ कवन काज
कबीरपद · लगभग २ मिनट