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मधुकर! जौ तुम हितू हमारे

पद · लगभग २ मिनट
मधुकर! जौ तुम हितू हमारे।तौ या भजन-सुधानिधि में जनि डारौ जोग-जल खारे॥सुनु सठ रीति, सुरभि पयदायक क्यों न लेत हल फारे?जो भयभीत होत रजु देखत क्यों बढ़वत अहि कारे॥निज कृत बूझि, बिना दसनन हति तजत धाम नहिं हारे।सो बल अछत निसा पंकज में दल-कपाट नहिं टारे॥रे अलि, चपल मोदरस-लंपट! कतहि बकत बिन काज?सूर स्याम-छबि क्यों बिसरत है नखसिख अंग बिराज?॥१५४॥

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