राम सुनहु न बिपति हमारी हो।तेरी मूरति की बलिहारी हो॥तेरे दिन प्रति चरण दिखावना। करि दया अंतरि आवना॥जन दादू बिपति सुनावना तुम गोबिंद तपति बुझावना॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सब तजि गुण आकार के, निहचल मन ल्यौ लाइदादू दयालकवितासब तजि गुण आकार के, निहचल मन ल्यौ लाइदादू दयाल२ मिनट का पाठ
जिन हम सिरजे’सो कहाँ, सतगुर देहु दिखाइदादू दयालकविताजिन हम सिरजे’सो कहाँ, सतगुर देहु दिखाइदादू दयाल२ मिनट का पाठ
निरंतर पिउ पाइया, तहँ पंखी उनमन जाइदादू दयालकवितानिरंतर पिउ पाइया, तहँ पंखी उनमन जाइदादू दयाल२ मिनट का पाठ