बनी राधा गिरधर की जोरी॥मनहु परस्पर कोटि मदनरति की सुंदरता चोरी॥नूतन श्याम नंदनंद बृखभान सुता नव गोरी।मनहु परिमल बदन चंद को पीवत चकोर चकोरी॥कुंभनदास प्रभु रसिक लाल बहु विधि रसिकनी निहोरी।मनहु परस्पर रंग बढ्यो अति उपजी प्रीत न थोरी॥

बनी राधा गिरधर की जोरी
कुंभनदासपद · लगभग २ मिनट