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फिरि फिरि कहा सिखावत बात?

पद · लगभग २ मिनट

राग सारंग

फिरि फिरि कहा सिखावत बात?प्रातकाल उठि देखत, ऊधो, घर घर माखन खात॥जाकी बात कहत हौ हमसों सो है हमसों दूरि।ह्याँ है निकट जसोदानँदन प्रान-सजीवनमूरि॥बालक संग लये दधि चोरत खात खवावत ड़ोलत।सूर सीस सुनि चौंकत नावहिं अब काहे न मुख बोलत?॥४८॥

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