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जाग्या रे नर नींद नसाई, चित चेत्यो च्यंतामणि पाई

पद · लगभग २ मिनट
जाग्या रे नर नींद नसाई,चित चेत्यो च्यंतामणि पाई॥ टेक॥सोवत सोवत बहुत दिन बीते, जन जाग्या तसकर गये रीते।जन जागे का ऐमहि नांण, बिष से लागे वेद पुराण।कहै कबीर अब सोवो नांहि, राम रतन पाया घट मांहि॥352॥

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