देखी पीर बरन पनहारी, पीरे रंग की सारी।पीरे रंग की पैरें पुँगरिया, पीरी जड़ी किनारी।रती भरे को लाँगा पैरें, तिलभर ओड़ैं सारी।जमनादास रात के बासी, पीरी राधा प्यारी॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+