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साधो भाई अपनो करनी नाहीं

सबद · लगभग २ मिनट
साधो भाई अपनो करनी नाहीं।जे करनी का करैं भरोसा, ते जम के घर जाहीं॥ना जानू धौं कहां मुए थे, ना जानू कहं आये।ना जानू हरि गर्म बसेरा, कौने भांति बनाये॥मही कठिन या हरि की माया, या तें कौन बचावे।जौन कहै जड़ मूलहिं त्यागी, तिन को हाथ लगावे॥यह संसार बड़े भौसागर, प्रलय काल ते भारी।बूड़त तें या सोई बाचे जेहि राखै करतारी॥लच्छ गऊ दे अन्न खात थे, राजा नृग से प्यारे।पुन्न करत जमा और गंवाई, ले गिरगिट के डारे॥गौतम नारि बड़ी पतिवरता, बहुते कीन्हे दाना।करनी करि बैकुंठ न पैठो, काहे भई पषाना॥मारहु मान छेम करि बैठो, छोड़ो गर्व गुमाना।आपा मेटो राम भजो तुम, कहत मलूक दिवाना॥

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