धनि धनि श्री वल्लभ जू के नंदन श्री विट्ठल, चरन सदा निज पावन॥जुग-पद कमल विराजमान अति, महिमा बहुत सदा मुनि गावन॥सेवा करौं, भजौ मन दृढ़ सोइ, त्रिविध भांति के ताप नसावन।छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल, बरसत कृपा सबै जिय भावन॥

धनि धनि श्री वल्लभ जू के नंदन
छीतस्वामीपद · लगभग २ मिनट