ऐसिय कुंज बनी छबिपुंज, रहै अलि गुंजत यों सुख लीजै।नैन बिसाल हिए बनमाल, बिलोकत रूप सुधा भरि पीजै॥जामिनि जाम की कौन कहै, जुग जात न जानिए ज्यों छिन छीजै।आनंद यों उमग्योई रहै, पिय मोहन को मुख देखिबो कीजै॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
किधौं काहू अदभुत चंद के चकोर भयेकुलपति मिश्रकविताकिधौं काहू अदभुत चंद के चकोर भयेकुलपति मिश्र२ मिनट का पाठ
मेरी चित चाह तें मिटो है उरदाह पियकुलपति मिश्रकवितामेरी चित चाह तें मिटो है उरदाह पियकुलपति मिश्र२ मिनट का पाठ
हूँ वे मुश्ताक़ तेरी सूरत का नूर देखकुलपति मिश्रकविताहूँ वे मुश्ताक़ तेरी सूरत का नूर देखकुलपति मिश्र२ मिनट का पाठ