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हाशिया
कविता
मान सहित बिष खायकै, संभु भये जगदीस
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
मान सहित बिष खायकै, संभु भये जगदीस।
बिन आदर अमृत पियो, राहु कटायो सीस॥१३९॥
॥
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माँगे मुकुरि न को गयो, केहि न त्यागियो साथ
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मानसरोवर ही मिलै, हंसनि मुकता भोग
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
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रहीम
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