हम से जनि लागे तू माया।थोरे से फिर बहुत होयगी, सुनि पैहैं रघुराया॥अपने में है साहेब हमरा, अजहूँ चेतु दिवानी।कहू जन के बस परि जैहो, भरत मरहूगी पानी॥तर ह्वै चितै लाज करूँ जनका, डारू हाथ की फाँसी।जन ते तेरो जोर न लहिहै, रच्छपाल अबिनासीं॥कहै मलूका चुप करु ठगनी, औगुन राखु दुराई।जौ जुन उवरै राम नाम कहि, ताते कछु न बसाई॥

हम से जनि लागे तू माया
मलूकदासपद · लगभग २ मिनट