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देखौ माधव की मित्राई

पद · लगभग २ मिनट

राग सारंग

देखौ माधव की मित्राई।आई उघरि कनक-कलई ज्यों दै निज गये दगाई॥हम जाने हरि हितू हमारे उनके चित्त ठगाई।छाँड़ी सुरति सबै ब्रजकुल की निठुर लोग बिलमाई॥प्रेम निबाहिं कहा वै जानैं साँचेई अहिराई।सूरदास बिरहिनी बिकल-मति कर मींजै पछिताई॥३७२॥

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