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हरति सब आरती आरती रामकी

पद · लगभग २ मिनट
हरति सब आरती आरती रामकी।दहन दुख-दोष, निरमूलिनी कामकी ॥ १ ॥सुरभ सौरभ धूप दीपबर मालिका।उड़त अघ-बिहँग सुनि ताल करतालिका ॥ २ ॥भक्त-ह्रदि-भवन, अज्ञान-तम-हारिनी।बिमल बिग्यानमय तेज-बिस्तारिनी ॥ ३ ॥मोह-मद-कोह-कलि-कंज-हिमजामिनी।मुक्तिकी दूतिका, देह-दुति दामिनी ॥ ४ ॥प्रनत-जन-कुमुद-बन-इंदु-कर-जालिका।तुलसि अभिमान-महिषेस बहु कालिका ॥ ५ ॥

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