गाइये गनपति जगबंदनतुलसीदासकवितागाइये गनपति जगबंदन
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३३७ रचनाएँ

गाइये गनपति जगबंदनतुलसीदासकविता
दीन-दयालु दिवाकर देवातुलसीदासकविता
को जाँचिये संभु तजि आनतुलसीदासकविता
दानी कहुँ संकर-सम नाहींतुलसीदासकविता
बावरो रावरो नाह भवानीतुलसीदासकविता
जाँचिये गिरिजापति कासीतुलसीदासकविता
कस न दीनपर द्रवहु उमाबरतुलसीदासकविता
देव बड़े, दाता बड़े, संकर बड़े भोरेतुलसीदासकविता
सिव! सिव! होइ प्रसन्न करु दायातुलसीदासकविता
देव, मोह-तम-तरणि, हर, रुद्र, संकर, शरण, हरण, मम शोक लोकाभिरामंतुलसीदासकविता
देव, भीषणाकार, भैरव, भयंकर, भूत-प्रेत-प्रमथाधिपति, विपति-हर्तातुलसीदासकविता
सदा- शंकरं, शंप्रदं, सज्जनानंददं, शैल-कन्या-वरं, परमरम्यंतुलसीदासकविता
सेवहु सिव-चरन-सरोज-रेनुतुलसीदासकविता
देखो देखो, बन बन्यो आजु उमाकंततुलसीदासकविता
दुसह दोष-दुख, दलनि, करु देवि दायातुलसीदासकविता
जय जय जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवितुलसीदासकविता
जय जय भगीरथनन्दिनि, मुनि-चय चकोर-चन्दिनितुलसीदासकविता
जयति जय सुरसरी जगदखिल-पावनीतुलसीदासकविता
हरनि पाप त्रिबिध ताप सुमिरत सुरसरिततुलसीदासकविता
ईस-सीस बससि, त्रिपथ लससि, नभ-पताल-धरनितुलसीदासकविता
जमुना यों ज्यों ज्यों लागी बाढ़नतुलसीदासकविता
सेइअ सहित सनेह देह भरि, कामधेनु कलि कासीतुलसीदासकविता
सब सोच-बिमोचन चित्रकूटतुलसीदासकविता
अब चित चेति चित्रकूटहि चलुतुलसीदासकविता
जयत्यंजनी-गर्भ-अंभोधि-संभूत विधु विबुध-कुल-कैरवानंदकारीतुलसीदासकविता
जयति मर्कटाधीश , मृगराज-विक्रम, महादेव, मुद-मंगलालय, कपालीतुलसीदासकविता
जयति मंगलागार, संसारभारापहर, वानराकारविग्रह पुरारीतुलसीदासकविता
जयति वात-संजात, विख्यात विक्रम, बृहद्बाहु, बलबिपुल, बालधिबिसालातुलसीदासकविता
जयति निर्भरानंद-संदोह कपिकेसरी, केसरी-सुवन भुवनैकभर्तातुलसीदासकविता
जाके गति है हनुमानकीतुलसीदासकविता
ताकिहै तमकि ताकी ओर कोतुलसीदासकविता
ऐसी तोही न बूझिये हनुमान हठीलेतुलसीदासकविता
समरथ सुअन समीरके, रघुबीर-पियारेतुलसीदासकविता
अति आरत, अति स्वारथी, अति दीन-दुखारीतुलसीदासकविता
कटु कहिये गाढे परे, सुनि समुझि सुसाईंतुलसीदासकविता
मंगल-मूरति मारुत-नंदनतुलसीदासकविता