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दीन-दयालु दिवाकर देवा

पद · लगभग २ मिनट
दीन-दयालु दिवाकर देवा। कर मुनि, मनुज, सुरासुर सेवा ॥ १ ॥हिम-तम-करि केहरि करमाली। दहन दोष-दुख-दुरित-रुजाली ॥ २ ॥कोक-कोकनद-लोक-प्रकासी। तेज-प्रताप-रूप-रस-रासी ॥ ३ ॥सारथि-पंगु, दिब्य रथ-गामी। हरि-संकर-बिधि-मूरति स्वामी ॥ ४ ॥बेद पुरान प्रगट जस जागै। तुलसी राम-भगति बर माँगै ॥ ५ ॥

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