गाइये गनपति जगबंदन। संकर-सुवन भवानी नंदन ॥ १ ॥सिद्धि-सदन, गज बदन, बिनायक। कृपा-सिंधु, सुंदर सब-लायक ॥ २ ॥मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता। बिद्या-बारिधि, बुद्धि बिधाता ॥ ३ ॥माँगत तुलसिदास कर जोरे। बसहिं रामसिय मानस मोरे ॥ ४ ॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
ऊधो! प्रीति करि निरमोहियन सों को न भयो दुख दीन?तुलसीदासकविताऊधो! प्रीति करि निरमोहियन सों को न भयो दुख दीन?तुलसीदास२ मिनट का पाठ