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मंगल-मूरति मारुत-नंदन

पद · लगभग २ मिनट
मंगल-मूरति मारुत-नंदन। सकल-अमंगल-मूल-निकंदन ॥ १ ॥पवनतनय संतन हितकारी। ह्रदय बिराजत अवध-बिहारी ॥ २ ॥मातु-पिता, गुरु, गनपति, सारद। सिवा समेत संभु, सुक, नारद ॥ ३ ॥चरन बंदि बिनवौं सब काहू। देहु रामपद-नेह-निबाहू ॥ ४ ॥बंदौं राम-लखन-बैदेही। जे तुलसीके परम सनेही ॥ ५ ॥

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