लाल लाडिले लखन, हित हौ जनके।सुमिरे संकटहारी, सकल सुमंगलकारी,पालक कृपालु अपने पनके ॥ १ ॥धरनी-धरनहार भंजन-भुवनभार,अवतार साहसी सहसफनके ॥सत्यसंध, सत्यब्रत, परम धरमरत,निरमल करम बचन अरु मन के ॥ २ ॥रूपके निधान, धनु-बान पानि,तून कटि, महाबीर बिदित, जितैया बड़े रनके ॥सेवक-सुख-दायक, सबल, सब लायक,गायक जानकीनाथ गुनगनके ॥ ३ ॥भावते भरत के, सुमित्रा-सीताके दुलारे,चातक चतुर राम स्याम घनके ॥बल्लभ उरमिलाके, सुलभ सनेहबस,धनी धन तुलसीसे निरधनके ॥ ४ ॥

लाल लाडिले लखन, हित हौ जनके
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट