मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

जयति मंगलागार, संसारभारापहर, वानराकारविग्रह पुरारी

पद · लगभग २ मिनट
जयति मंगलागार, संसारभारापहर, वानराकारविग्रह पुरारी।राम-रोषानल-ज्वालमाला-मिष ध्वांतर-सलभ-संहारकारी ॥ १ ॥जयति मरुदंजनामोद-मंदिर, नतग्रीव सुग्रीव-दुखःखैकबंधो।यातुधानोद्धत-क्रुद्ध-कालाग्निहर, सिद्ध-सुर-सज्जनानंद-सिंधो ॥ २ ॥जयति रुद्राग्रणी, विश्व-वंद्याग्रणी, विश्वविख्यात-भट-चक्रवर्ती।सामगाताग्रणी, कामजेताग्रणी, रामहित, रामभक्तानुवर्ती ॥ ३ ॥जयतिसंग्रामजय, रामसंदेसहर, कौशला-कुशल-कल्याणभाषी।राम-विरहार्क-संतप्त-भरतादि-नरनारि-शीतलकरण कल्पशाषी ॥ ४ ॥जयति सिंहासनासीन सीतारमण, निरखि निर्भरहरण नृत्यकारी।राम संभ्राज शोभा-सहित सर्वदा तुलसिमानस-रामपुर-विहारी ॥ ५ ॥

अब कुछ और पढ़ें