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जयति मर्कटाधीश , मृगराज-विक्रम, महादेव, मुद-मंगलालय, कपाली

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जयति मर्कटाधीश , मृगराज-विक्रम, महादेव, मुद-मंगलालय, कपाली।मोह-मद-क्रोध-कामादि-खल-संकुला, घोर संसार-निशि किरणमाली ॥ १ ॥जयति लसदंजनाऽदितिज, कपि-केसरी-कश्यप-प्रभव, जगदार्त्तिहर्त्ता।लोक-लोकप-कोक-कोकनद-शोकहर, हंस हनुमान कल्यानकर्ता ॥ २ ॥जयति सुविशाल-विकराल-विग्रह, वज्रसार सर्वांग भुजदण्ड भारी।कुलिशनख, दशनवर लसत, बालधि बृहद, वैरि-शस्त्रास्त्रधर कुधरधारी ॥ ३ ॥जयति जानकी-शोच-संताप-मोचन, रामलक्ष्मणानंद-वारिज-विकासी।कीस-कौतुक-केलि-लूम-लंका-दहन, दलन कानन तरुण तेजरासी ॥ ४ ॥जयति पाथोधि-पाषाण-जलयानकर, यातुधान-प्रचुर-हर्ष-हाता।दुष्टरावण-कुंभकर्ण-पाकारिजित-मर्मभित्, कर्म-परिपाक-दाता ॥ ५ ॥जयति भुवननैकभूषण, विभीषणवरद, विहित कृत राम-संग्राम साका।जयति पर-यत्रंमंत्राभिचार-ग्रसन, कारमन-कूट-कृत्यादि-हंता।शाकिनी-डाकिनी-पूतना-प्रेत-वेताल-भूत-प्रमथ-यूथ-यंता ॥ ७ ॥पुष्पकारूढ़ सौमित्रि-सीता-सहित, भानु-कुलभानु-कीरति-पताका ॥जयति वेदान्तविद विविध-विद्या-विशद, वेद-वेदांगविद ब्रह्मवादी।ज्ञान- विज्ञान-वैराग्य-भाजन विभो, विमल गुण गनति शुकनारदादी ॥ ८ ॥जयति काल-गुण-कर्म-माया-मथन, निश्चलज्ञान, व्रत-सत्यरत, धर्मचारी।सिद्ध-सुरवृंद-योगींद्र-सेवति सदा, दास तुलसी प्रणत भय-तमारी ॥ ९ ॥

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