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जय जय भगीरथनन्दिनि, मुनि-चय चकोर-चन्दिनि

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जय जय भगीरथनन्दिनि, मुनि-चय चकोर-चन्दिनि,नर-नाग-बिबुध-बन्दिनि जय जह्नु बालिका।बिस्नु-पद-सरोजजासि, ईस-सीसपर बिभासि,त्रिपथगासि, पुन्यरासि, पाप-छालिका ॥ १ ॥बिमल बिपुल बहसि बारि, सीतल त्रयताप-हारि,भँवर बर बिभंगतर तरंग-मालिका।पुरजन पूजोपहार, सोभित ससि धवलधार,भंजन भव-भार, भक्ति-कल्पथालिका ॥ २ ॥निज तटबासी बिहंग, जल-थल-चर पसु-पतंग,कीट, जटिल तापस सब सरिस पालिका।तुलसी तव तीर तीर सुमिरत रघुबंस-बीर,बिचरत मति देहि मोह-महिष-कालिका ॥ ३ ॥

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