देव-दनुज-बन-दहन, गुन-गहन, गोविंद नंदादि-आनंद-दाताऽविनाशी।शंभु, शिव, रुद्र, शंकर, भयंकर, भीम, घोर, तेजायतन, क्रोध-राशी ॥ १ ॥अनँत, भगवंत-जगदंत-अंतक-त्रास-शमन, श्रीरमन, भुवनाभिरामं।भूधराधीश जगदीश ईशान, विज्ञानघन, ज्ञान-कल्यान-धामं ॥ २ ॥वामनाव्यक्त, पावन, परावर, विभो, प्रकट परमातमा, प्रकृति-स्वामी।चंद्रशेखर, शूलपाणि, हर, अनघ, अज, अमित, अविछिन्न, वृशभेश-गामी ॥ ३ ॥नीलजलदाभ तनु श्याम, बहु काम छवि राम राजीवलोचन कृपाला।कबुं-कर्पूर-वपु धवल, निर्मल मौलि जटा, सुर-तटिनि, सित सुमन माला ॥ ४ ॥वसन किंजल्कधर, चक्र-सारंग-दर-कंज-कौमोदकी अति विशाला।मार-करि-मत्त-मृगराज, त्रैनैन, हर, नौमि अपहरण संसार-जाला ॥ ५ ॥कृष्ण, करुणाभवन, दवन कालीय खल, विपुल कंसादि निर्वशकारी।त्रिपुर-मद-भंगकर, मत्तगज-चर्मधर, अन्धकोरग-ग्रसन पन्नगारी ॥ ६ ॥ब्रह्म, व्यापक, अकल, सकल, पर, परमहित, ग्यान, गोतीत, गुण-वृत्ति-हर्त्ता।सिंधुसुत-गर्व-गिरि-वज्र, गौरीश, भव दक्ष-मख अखिल विध्वंसकर्त्ता ॥ ७ ॥भक्तिप्रिय, भक्तजन-कामधुक धेनु, हरि हरण दुर्घट विकट विपति भारी।सुखद, नर्मद, वरद, विरज, अनवघ्यऽखिल, विपिन-आनंद-वीथिन-विहारीरुचिर हरिशंकरी नाम-मंत्रावली द्वंद्वदुख हरनि, आनंदखानी।विष्णु-शिव-लोक-सोपान-सम सर्वदा वदति तुलसीदास विशद बानी ॥ ८ ॥

