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गावत गोपाल लाल नीकें राग नट हैं

पद · लगभग २ मिनट
गावत गोपाल लाल नीकें राग नट हैं।चलि री आलि देखन, लोयन लाहु पेखन, ठाढ़े सुरतरु तर तटिनी के तट हैं ।। 1 ।।मोरचंदा चारु सिर, मंजु गुंजापुंज धरें, बनि बनधातु तन ओढ़े पीत पट हैं।मुरली तान तरँग, मोहे कुरँग बिहँग, जोहैं मूरति त्रिभंग निपट निकट हैं ।। 2 ।।अंबर अमर हरषत बरषत फूल, स्नेह सिथिल गोप गाइन के ठट हैं।तुलसी प्रभु निहारि जहाँ तहाँ ब्रज नारि, ठगी ठाढ़ी मग लिएँ रीते भरे घट हैं ।। 3 ।।

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