इब तूँ हास प्रभु में कुछ नाँहीं, पंडित पढ़ि अभिमाँन नसाँहीं॥ टेक॥मैं मैं मैं जब लग मैं कीन्हा, तब लग मैं करता नहीं चीन्हाँ।कहै कबीर सुनहु नरनाहा, नाँ हम जीवत न मूँवाले माहाँ॥65॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीरकवितासुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीर२ मिनट का पाठ
स्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीरकवितास्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीर२ मिनट का पाठ