हीरै हीरा बेधि पवन मन सहजे रह्या समाई।सकल जोति इन हीरै बेधी सतिगुरु बचनी मैं पाई॥हरि की कथा अनाहद बानी हंस ह्नै हीरा लेइ पछानी॥कह कबीर हीरा अस देख्यो जग महि रह्या समाई॥गुपता हीरा प्रकट भयो जब गुरु गम दिया दिखाई॥220॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
स्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीरकवितास्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीर२ मिनट का पाठ