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हृदय कपट मुख ज्ञानी

पद · लगभग २ मिनट
हृदय कपट मुख ज्ञानी। झूठे कहा बिलोवसि पानी॥काया मांजसि कौन गुना। जो घट भीतर है मलनाँ॥लौकी अठ सठि तीरथ न्हाई। कौरापन तऊ न जाई॥कहि कबीर बीचारी। भव सागर तारि मुरारी॥221॥

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