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माधौ मैं ऐसा अपराधी, तेरी भगति होत नहीं साधी

पद · लगभग २ मिनट
माधौ मैं ऐसा अपराधी, तेरी भगति होत नहीं साधी॥ टेक॥कारनि कवन जाइ जग जनम्याँ, जनमि कवन सचु पाया।भौ जल तिरण चरण च्यंतामणि, ता चित घड़ी न लाया॥पर निंद्या पर धन पर दारा, पर अपवादैं सूरा।ताथैं आवागवन होइ फुनि फुनि, तां पर संग न चूरा॥काम क्रोध माया मद मंछर, ए संतति हम माँही।दया धरम ग्यान गुर सेवा, ए प्रभु सुपिनै नाँहीं॥तुम्ह कृपाल दयाल दमादर, भगत बछल भौ हारो।कहै कबीर धीर मति राखहु, सासति करौं हमारी॥191॥

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