अल्लह एकु मसीति बसतु है अवर मुलकु किसु केरा।हिंदू मूरति नाम निवासी दुहमति तत्तु न हेरा॥अल्लह राम जीउ तेरी नाई। तू करीमह राम तिसाई॥दक्खन देस हरी का बासा पच्छिम अलह मुकामा।दिल महि खोजि दिलै दिल खोजहु एही ठौर मुकामा॥ब्रह्म न ज्ञान करहि चौबीसा काजी महरम जाना॥ग्यारह मास पास कै राखे एकै माहि निधाना॥कहाउड़ीसे मज्जन कियाँ क्या मसीत सिर नायें॥दिल महि कपट निवाज गुजारै क्या हज काबै जायें॥एते औरत मरदा साजै ये सब रूप तुमारे॥कबीर पूंगरा राम अलह का सब गुरु पीर हमारे॥कहत कबीर सुनहु नर नरवै परहु एक की सरना।केवल नाम जपहु रे प्रानी तबही निहचै तरना॥9॥

अल्लह एकु मसीति बसतु है अवर मुलकु किसु केरा
कबीरपद · लगभग २ मिनट