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चंद सूरज दुइ जोति सरूप

पद · लगभग २ मिनट
चंद सूरज दुइ जोति सरूप। जीता अंतरि ब्रह्म अनूप॥करु रे ज्ञानी ब्रह्म बिचारु। जोति अंतरि धरि आप सारु॥हीरा देखि हीरै करो आदेस। कहै कबीर निरंजन अलेखु॥67॥

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