बटुआ एक बहत्तरि आधारी एको जिसहि दुबारा।नवै खंड की प्रथमी माँगै सो जोगी जगसारा॥ऐसो जोगी नव निधि पावै तल का ब्रह्म ले गगन चरावै॥खिंथा ज्ञान ध्यान करि सूई सबद ताग मथि घालै॥पंच तत्व की करि मिरगाणी गुरु कै मारग चालै॥दया फाहुरी काया करि धूई दृष्टि की जलावै॥तिसका भाव लए रिद अंतर चहु जुग ताड़ी लावै॥सभ जोगत्तण राम नाम है जिसका पिंड पराना।कहु कबीर जे किरपा धारै देइ सचा नीसाना॥145॥

बटुआ एक बहत्तरि आधारी एको जिसहि दुबारा
कबीरपद · लगभग २ मिनट