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राम सिमरि राम सिमरि राम सिमिरि भाई

पद · लगभग २ मिनट
राम सिमरि राम सिमरि राम सिमिरि भाई।राम नाम सिमिरन बिनु बूड़ते अधिकाई॥बनिता सुत देह ग्रेह संपति सुखदाई।इनमें कछु नाहिं तेरो काल अवधि आई॥अजामल गज गनिका पतित कर्म कीने।तेऊ उतरि पार परे राम नाम लीने।सूकर कूकर जोनि भ्रमतेऊ लाज न आई।राम नाम छाड़ि अमृत काहे बिष खाई॥तजि भर्म कर्म बिधि निषेध राम नाम लेही।गुरु प्रसाद जन कबीर राम करि सनेही॥179॥

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