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सिव की पुरी बस बुधि सारु

पद · लगभग २ मिनट
सिव की पुरी बस बुधि सारु। यह तुम मिलि कै करहु बिचार॥ईत ऊत की सोझौ परै। कौन कर्म मेरा करि करि मरै॥निज पद ऊपर लागौ ध्यान। राजा राम नाम मेरा ब्रह्म ज्ञान॥मूल दुआरै बंध्या बंधु। रवि ऊपर गहि राख्या चंदु॥पंचम द्वारे की सिल ओड़। तिह सिल ऊपर खिड़की और॥खिड़की ऊपर दसवा द्वार। कहि कबीर ताका अंतु न पार॥206॥

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