सोना लावन पिव गये, सूना करि गये देश।सोना मिले न पिव मिले, रूपा ह्वैगे केश॥रूपा ह्वैगे केश, रोय रँग रूप गवाँवा।सेजन को विश्राम, पिया बिन कबहुँ न पावा॥कह गिरिधर कबिराय लोन बिन सबै अलोना।बहुरि पिया घर आव कहा करिहौं लै सोना॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+