मूसा कहै बिलार सौंगिरिधर कविरायकवितामूसा कहै बिलार सौं
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३९ रचनाएँ

मूसा कहै बिलार सौंगिरिधर कविरायकविता
मित्र-बिछोहा अति कठिनगिरिधर कविरायकविता
साईं अपने भ्रात कोगिरिधर कविरायकविता
साईं समय न चूकियेगिरिधर कविरायकविता
मोती लावन पिय गएगिरिधर कविरायकविता
काची रोटी कुचकुचीगिरिधर कविरायकविता
राजा के दरबार मेंगिरिधर कविरायकविता
रहिये लटपट काटि दिनगिरिधर कविरायकविता
साईं अवसर के पड़ेगिरिधर कविरायकविता
साईं इन्हैं न विरोधियेगिरिधर कविरायकविता
कमरी थोरे दाम कीगिरिधर कविरायकविता
कृतघन कबहुँ न मानहींगिरिधर कविरायकविता
जाकी धन धरती हरिगिरिधर कविरायकविता
साईं घोड़े आछतहिगिरिधर कविरायकविता
करुणा हो श्रीराम कीगिरिधर कविरायकविता
करै कृपा जिस पुरुष परगिरिधर कविरायकविता
हुक्का बाँधो फेंट मेंगिरिधर कविरायकविता
ताप मध्य में ताप हूँगिरिधर कविरायकविता
कोप करै जिस शख्स परगिरिधर कविरायकविता
बीती ताहि बिसारि देगिरिधर कविरायकविता
पीवै नीर न सरवरौंगिरिधर कविरायकविता
सुवा एक दाड़िम के धोकेगिरिधर कविरायकविता
कौवा कहे मराल सेगिरिधर कविरायकविता
बिना बिचारे जो करैगिरिधर कविरायकविता
जैसा यह मन भूत हैगिरिधर कविरायकविता
अवश्यमेव भोक्तव्य हैगिरिधर कविरायकविता
साईं बैर न कीजियेगिरिधर कविरायकविता
लाठी में गुण बहुत हैंगिरिधर कविरायकविता
भाग सर्वत्र फलत हैगिरिधर कविरायकविता
पानी बाढ़ो नाव मेंगिरिधर कविरायकविता
गिरिधर सो जो गिरिधरैगिरिधर कविरायकविता
सोना लावन पिव गयेगिरिधर कविरायकविता
साईं सब संसार मेंगिरिधर कविरायकविता
दौलत पाइ न कीजियेगिरिधर कविरायकविता
साईं ऐसे पुत्र सेगिरिधर कविरायकविता
साईं बेटा बाप केगिरिधर कविरायकविता