साईं अवसर के पड़े, को न सहै दुखद्वंद।जाय बिकाने डोमघर, वै राजा हरिचंद॥वै राजा हरिचंद, करैं मरघट रखवारी।करे तपस्वी वेष, फिरे अर्जुन बलधारी॥कह गिरिधर कबिराय तपै वह भीम रसोईं।को न करे घटि काम परे अवसर के साईं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+