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गुण के गाहक सहस नर

कुंडलियाँ · लगभग २ मिनट
गुण के गाहक सहस नर, बिनु गुण लहै न कोय।जैसे कागा कोकिला, शब्द सुनै सब कोय॥शब्द सुनै सब कोय, कोकिला सबै सुहावन।दोऊको यक रंग, काग सब भये अपावन॥कह गिरिधर कबिराय सुनो हो ठाकुर मन के।बिनु गुण लहै न कोई सहस नर गाहक गुण के॥

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